अध्यात्म

Shivratri: विपरीत परिस्थितियों में भी एकता के साथ रहने की शिक्षा देता है शिव परिवार

शिवरात्रि 2022: सभी पर्व कोई न कोई संदेश को लेकर आते हैं. इन संदेशों से ही हम अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक चीजों को समझ पाने सक्षम होते हैं और साथ ही शिव तक पहुंचने का रास्ता मिल जाए तो क्या करें. आज हम बात करने जा रहें मार्च माह के पहले त्यौहार महाशिवरात्रि की. जानिए इस त्यौहार का क्या संदेश और साथ ही यह भी जानिए कि विपरीत परिस्थितियों में भी साथ कैसे रहना चाहिए. यह है शिव परिवार की महिमा.

देवों के देव महादेव में अनुपम सामंजस्य, अद्भुत समन्वय और उत्कृष्ट सद्भाव के दर्शन होते हैं. इसलिए हमें उनके इन गुणों से शिक्षा लेकर विश्व कल्याण के महान कार्यों में लगना चाहिए. यही इस परम पावन पर्व का मानव जाति के प्रति दिव्य संदेश है.

शिव अर्धनारीश्वर होकर भी काम विजेता हैं, गृहस्थ होते हुए भी परम विरक्त हैं. हलाहल पान करने के कारण नीलकंठ होकर भी विष के प्रभाव से मुक्त हैं. उग्र होते हुए भी सौम्य हैं. अकिंचन होते हुए भी सर्वेश्वर हैं. भयंकर विषधर नाग और सौम्य चन्द्रमा दोनों ही उनके आभूषण हैं, मस्तक में तीसरी आंख रूपी प्रलय कालीन अग्नि और सिर पर परम शीतल गंगा है. शीश से निकली हुई गंगा की धारा पृथ्वी के लोगों का कल्याण कर रही हैं. उनके यहाँ वृषभ यानी बैल जो कि भोले की सवारी है और सिंह जो कि मां शक्ति की सवारी है तथा मोर कार्तिकेय की सवारी है, वहीं मूषक गणपति की सवारी है. शिव परिवार में आपसी बैर भुलाकर साथ-साथ प्रेम से रहना समस्त विरोधी भावों के बहुत सुंदर समन्वय की शिक्षा देता है. विश्व को शिव परिवार के विपरीत स्वभाव में सामंजस्य बनाए रखने की अद्भुत शिक्षा मिलती है.

क्या है शिवलिंग?

श्रीविग्रह शिवलिंग ब्रह्मांड एवं निराकार ब्रह्म का प्रतीक होने के कारण सभी के लिए पूजनीय है. जिस प्रकार निराकार ब्रह्म रूप, रंग, आकार आदि से रहित होता है उसी प्रकार शिवलिंग भी है. जिस प्रकार गणित में शून्य कुछ न होते हुए भी सब कुछ होता है. किसी भी अंक के दाहिने होकर जिस प्रकार यह उस अंक का दस गुणा मूल्य कर देता है. उसी प्रकार शिवलिंग की पूजा से शिव भी दाहिने होकर मनुष्य को अनन्त सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं. मानव को उपर्युक्त शिक्षा ग्रहण कर उनके इस महान महाशिवरात्रि- महोत्सव को बड़े समारोह पूर्वक मनाना चाहिये.

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