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किसान आंदोलन की आड़ में सिखों और हिंदुओं में लड़ाई की चल रही थी साजिश, PM मोदी के फैसले से मंसूबे हुए नाकाम: श्री अकाल तख्त जत्थेदार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानून वापस लेने के फैसले पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बड़ा बयान दिया है। जत्थेदार ने कहा...

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानून वापस लेने के फैसले पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बड़ा बयान दिया है। जत्थेदार ने कहा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन की आड़ में सिखों-भारत सरकार और सिखों-हिंदुओं के बीच लड़ाई करवाने की साजिश रची जा रही थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले से उनके मंसूबे नाकाम हो गए। एक वीडियो में उन्होंने इसके लिए भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत उनकी पूरी कैबिनेट का धन्यवाद किया।

जत्थेदार ने कहा कि कानून वापस के एलान होने से एक बड़ी राष्ट्रीय विपदा टल गई है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में कुछ ऐसे गुट थे, जो सिख सोच, निशान, फलसफे, इतिहास और भावनाओं को दरकिनार कर रहे थे। आने वाले समय में हमें इसके नुकसान झेलने पड़ते। जत्थेदार का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पंजाब शुरू से ही किसान आंदोलन का सिरमौर बना हुआ है। पंजाब से ही शुरू होकर यह आंदोलन पूरे देश में फैला।

गौरतलब है कि हिंदुस्तान के किसान आंदोलन के लिए 19 नवंबर सबसे बड़ा दिन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया था। राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार तीनों कृषि कानून किसानों के भले के लिए लेकर आई थी लेकिन वो कुछ किसान भाइयों को समझा नहीं पाए और अब सरकार कृषि कानूनों को वापस ले रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार तीनों कानून वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेगी। पीएम मोदी ने खुले मन से कहा कि ये समय किसी को भी दोष देने का नहीं है। सरकार ने 3 कृषि कानून वापस ले लिए हैं और अब किसान साथी अपने-अपने घर लौटें।

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